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योग्य कोच के बिना प्रतिभाग संवारना जटिल चुनौती 
October 6, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ


हरिद्वारः 6 अक्टूबर, नेशनल कोच दिवस पर  गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय में शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ0 शिवकुमार चौहान का कहना है, कि जटिलताओं से सीखना जीवन की स्वभाविक प्रक्रिया है। जिसमें व्यक्ति खुद को तपाकर कुंदन बनाने का प्रयास करता है। इस कुंदन बनाने की प्रक्रिया के लिए एक योग्य कारीगर का मिलना जरूरी है। जिसके मार्गदर्शन में तपकर संवरने वाला व्यक्ति बेहतर एवं आकर्षक आकृति ग्रहण कर पाता है। इसलिए जीवन अथवा खेल के क्षेत्र मे एक योग्य कोच अथवा प्रशिक्षक का होना जरूरी है।

डाॅ0 चैहान ने खेल की विभिन्न विद्याओं से जुडे कोच अथवा टेªनर के लिए नेशनल कोच दिवस की महत्ता बताते हुए कहाॅ कि कोचिंग के माध्यम से नये खिलाडियों को तैयार करना कोच की अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जो राष्ट्र निर्माण की भावना से जुडी हुई है। इसलिए आज के दिन इस बात पर मंथन किया जाना चाहिए की देश का भविष्य तथा खेलों भावी खिलाडियों को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाये जिससे वे अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर देश का गौरव बढाने मे स्वयं को सिद्व कर सके। नेशनल कोच दिवस के अवसर पर उन्होने सभी कोच तथा ट्रेनर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए दी है।