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स्थितप्रज्ञ बनने की दिशा में साधना आवश्यकः डॉ पण्ड्या
October 19, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

हरिद्वार:  अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि स्थितप्रज्ञ बनने की दिशा में साधना आवश्यक है। किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए साधना सर्वोपरि है। शक्ति की आराधना का महापर्व के रूप में समर्पित नवरात्र साधना ऐसे ही एक सर्वसुलभ सुनहरा अवसर है।

युवा उत्प्रेरक श्रद्धेय डॉ पण्ड्या नवरात्र साधना में जुटे साधकों को वर्चुअल संदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जब साधक मन में उठने वाली समस्त कामनाओं को त्याग देता है या मन से बाहर निकाल देता है और आत्मा के द्वारा आत्मा में ही संतुष्ट रहता है तब वह स्थित प्रज्ञ कहलाता है। ऐसी स्थिति प्राप्त करने के लिए साधना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि साधकों को अपनी कामनाओं, इच्छाओं के जंजाल को पूरा करने के लिए नहीं, वरन् सार्थक उपलब्धि करने के लिए जप-तप करनी चाहिए। साधना से मन स्थिर और विवेक का जागरण होता है। विवेक के जागरण से मनुष्य भटकता नहीं है। विवेक प्रगति के अनेकानेक द्वार खोलता है।

उन्होंने श्रीमद्भगवतगीता में  अर्जुन और श्रीकृष्ण संवाद का उल्लेख करते हुए स्थितप्रज्ञ की ओर अग्रसर होने के लिए साधना करने पर प्रेरित किया।