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राफेल लड़ाकू विमान की जानकारी
July 28, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ
 

पांच राफेल लड़ाकू विमान भारत में बुधवार को आ जाएंगे। फिलहाल ये राफेल रास्ते में हैं। भारतीय वायुसेना ने सहयोग के लिए फ्रांस की एयरफोर्स का शुक्रिया जताया है।

वहींसुरक्षा के लिहाज़ से अंबाला एयरबेस के पास 4 गांवों में धारा 144 लागू कर दी गई है। फाइटर जेट की लैंडिंग के दौरान लोगों की भीड़ छतों पर जमा होने और फोटोग्राफी पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है। पुलिस ने बताया कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार राफेल यूएई के अल-धफरा एयरबेस से सुबह करीब 11 बजे उड़ान भरेगा और दोपहर 2 बजे अंबाला पहुंचेगा।

फ्रांस के मेरिनेक एयरबेस से 5 राफेल फाइटर विमानों का पहला बैच सोमवार को भारत के लिए रवाना हुआ था। पायलटों को आराम देने के लिए विमान यूएई में रुके हैं। 7 हजार किमी की दूरी तय कर यह बैच बुधवार 29 जुलाई बुधवार को भारत पहुंचेगा। इन फाइटर जेट्स के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। पांचों राफेल की तैनाती अंबाला में होगी।

 राफेल डील की कहानी
सितंबर 2016 में भारत सरकार और फ्रांस की दैसो एविएशन के बीच राफेल फाइटर जेट को लेकर डील हुई। ये पूरी डील 58 हजार 891 करोड़ रुपए की है। इसमें 28 सिंगल-सीटर और 8 डबल-सीटर जेट खरीदे जा रहे हैं।

इस डील में ऑफसेट क्लॉज भी जोड़ा गया है, जिसकी वैल्यू 50% है। यानी, जितने की डील हुई है, उसकी 50% रकम कंपनी भारत में निवेश करेगी। राफेल डील की कीमत करीब 59 हजार करोड़ रुपए है, तो करीब 30 हजार करोड़ रुपए फ्रांस की कंपनियों की तरफ से भारत में ही आएगा।

  • इसी ऑफसेट क्लॉज की वजह से भारत में राफेल डील को लेकर जमकर विवाद भी हुआ था। कांग्रेस का आरोप था कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी को इस डील में ऑफसेट पार्टनर बना दिया, ताकि उन्हें फायदा हो।
  • राफेल उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलट्स की ट्रेनिंग फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन एयरबेस पर हुई। यही लोग भारत आकर दूसरे साथियों को ट्रेनिंग देंगे।
  • फ्रांस के एयरबेस पर भारतीय पायलट्स ने सिम्युलेटर में भी राफेल उड़ाकर देखे। सिम्युलेटर एक तरह की मशीन होती है, जिसका इस्तेमाल ट्रेनिंग के लिए किया जाता है।
  • 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज राफेल की पहली स्क्वाड्रन होगी। खास बात ये है कि पूर्व एयर चीफ बीएस धनोआ ने कारगिल युद्ध के दौरान इस स्क्वाड्रन की कमान संभाली थी।

27 जुलाई की सुबह फ्रांस के मेरिनेक एयरबेस से 5 राफेल फाइटर जेट ने उड़ान भरी। ये विमान 29 जुलाई को हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर उतरेंगे। मेरिनेक एयरबेस से अंबाला एयरबेस के बीच 7 हजार किमी की दूरी है। फ्रांस से भारत आने में सिर्फ एक ही स्टॉप लिया। पायलट्स को आराम देने के लिए इसे यूएई के अल-दफरा एयरबेस पर रोका गया। उसके बाद वहां से सीधे अंबाला एयरबेस पर उतरेगा।                                                                                 

राफेल की तैनाती

  • राफेल की पहली स्क्वाड्रन को अंबाला एयरबेस पर तैनात किया जा रहा है। यहां से चीन-पाकिस्तान की सीमा बस 200 किमी दूर है।
  • अंबाला एयरबेस भारत की पश्चिमी सीमा से 200 किमी दूर है और पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस के नजदीक भी। यहां पर तैनाती से पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ तेजी से एक्शन लिया जा सकेगा।
  • चीन की सीमा से भी इसकी दूरी 200 किमी है। अंबाला एयरबेस से 300 किमी दूर लेह के सामने चीन का गर गुंसा एयरबेस है।

राफेल की खासियत

  • राफेल को राडार क्रॉस-सेक्शन और इन्फ्रा-रेड सिग्नेचर के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें ग्लास कॉकपिट है। इसके साथ ही एक कम्प्यूटर सिस्टम भी है, जो पायलट को कमांड और कंट्रोल करने में मदद करता है। इसमें ताकतवर एम 88 इंजन लगा हुआ है। राफेल में एक एडवांस्ड एवियोनिक्स सूट भी है।
  •  इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है।
  • इस जेट में आरबीई 2 एए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) राडार लगा है, जो लो-ऑब्जर्वेशन टारगेट को पहचानने में मदद करता है।
  • इसमें लगा स्पेक्ट्रा लंबी दूरी के टारगेट को भी पहचान सकता है।
  • किसी भी खतरे की आशंका की स्थिति में इसमें लगा राडार वॉर्निंग रिसीवर, लेजर वॉर्निंग और मिसाइल एप्रोच वॉर्निंग अलर्ट हो जाता है और राडार को जाम करने से बचाता है। 
  • राफेल का राडार सिस्टम 200 किमी के दायरे में भी टारगेट को डिटेक्ट कर लेता है।
  • राफेल में आधुनिक हथियार भी हैं। जैसे- इसमें 125 राउंड के साथ 30 एमएम की कैनन है। ये एक बार में साढ़े 9 हजार किलो का सामान ले जा सकता है।
  • इसमें हवा से हवा में मारने वाली मैजिक-II, एमबीडीए मीका आईआर या ईएम और एमबीडीए मीटियर जैसी मिसाइलें हैं। ये मिसाइलें हवा में 150 किमी तक के टारगेट को मार सकती हैं।
  • इसमें हवा से जमीन में मारने की भी ताकत है। इसकी रेंज 560 किमी है।