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पुलिस की सीपीयू यूनिट को भंग करने की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन
July 29, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

हरिद्वारः उत्तराखंड राज्य में सीपीयू का गठन इसलिए किया गया होगा कि राज्य में आपराधिक गतिविधियों पर विराम व लगाम लग सके और उत्तराखंड राज्य की कानून व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो।

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सीपीयू का गठन किया गया था लेकिन उत्तराखंड राज्य में जबसे सीपीयू का गठन हुआ है तबसे आम जनता, नागरिकों का मोटरवाईकल एक्ट के नाम पर उत्पीडन व शोषण किये जाने के गठनाओ का अंबार लगा हुआ है। सीपीयू के गठन को अनऔचिय ठहराते हुए सीपीयू पुलिस विभाग को भंग किये जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सामाजिक दूरी के साथ पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय चोपड़ा के संयोजन में पुरानी सब्जी मंडी स्थित प्रांगण में वृक्षारोपण कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सरकार से मांग की उत्तराखंड राज्य सीपीयू पुलिस के गठन को जनहित में भंग किये जाने की मांग को दोहराया।
इस अवसर पर पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष, भाजपा नेता संजय चोपड़ा ने कहा उत्तराखंड राज्य में जबसे सीपीयू पुलिस का गठन हुआ है तबसे आम नागरिकों के उत्पीडन व शोषण की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है सीपीयू पुलिस की कार्यशैली आम मित्र पुलिस की शाख पर भी बट्टा लगा रही है जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा हालहिं में सीपीयू द्वारा कुमाऊ रेंज में एक युवक के साथ अमान्य घटना को अंजाम दिया गया इससे कही ना कही सीपीयू की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे है। उन्होंने यह भी कहा हरिद्वार के व्यापारी द्वारा हेलमेट, मास्क व सारे कागज दिखाने के बावजूद भी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाना निंदनीय है।
इस अवसर पर युवा व्यापारी नेता संजय बंसल ने कहा उत्तराखंड राज्य में पूर्वती सरकार के कार्यकाल में सीपीयू पुलिस का गठन यह सोचकर किया गया था कि राज्य में कानून व्यवस्था बाखूबी चलती रहेगी और आपराधिक गतिविधियों में भी खौफ बना रहेगा लेकिन सीपीयू पुलिस की कार्यशैली में हमेशा सीपीयू विवादित रहे है और आपराधिक गतिविधियों में अंकुश लगाने में सीपीयू की कार्यशैली शून्य रही है ऐसे में राज्य सरकार को कोविड-19 के दृष्टिगत एक बड़ा बजट जोकि सीपीयू पर खर्च किया जाता है।
सीपीयू पुलिस की कार्यशैली व आम जनता के उत्पीडन व शोषण के खिलाफ वृक्षारोपण कर विरोध प्रदर्शन करते कुलदीप खन्ना, अखिलेश, राजेश अरोड़ा, राधेश्याम, हंसराज दुआ, दिनेश कुमार, मोहनलाल, काजू बिहारी, राजकुमार, वीरेंद्र रावत, राधेश्याम रतूड़ी आदि शामिल रहे।