ALL विज्ञान स्वास्थ्य स्वाद समाचार ज्ञानवर्धक जानकारी जनहित abhivyakti
पीएम मोदी के संदेश पर शुरु किया आत्मनिर्भर ढाबा
June 12, 2020 • SANJEEV SHARMA

हल्द्वानी, नवल टाइम्सः कोरोना के मुश्किल दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया है। विरोधी भले ही इस आह्वान का मजाक उड़ाएं लेकिन जमीन पर इसका असर दिखने लगा है।

इस मिशन को उत्तराखंड के हल्द्वानी में रहने वाले दो भाइयों ने हाथों-हाथ लिया है और ब्लॉक दफ्तर के ठीक सामने दो आत्मनिर्भर बनने के लिए एक ढाबा शुरु कर डाला है। मजेदार बात ये है कि डीके और मुकेश बिष्ट ने इस ढाबे का नाम भी आत्मनिर्भर भोजनालय रखा है।

ढाबे का नाम इलाके से गुजर रहे और यहां खाने के लिए पहुंच रहे लोगों के बीच चर्चा में बना हुआ है। हल्द्वानी के बिठोरिया में रहने वाले डीके बिष्ट और मुकेश बिष्ट दो भाई हैं। दोनों ने लॉक डाउन में इस काम को शुरु करने का निर्णय लिया और किराए दुकान ले ली. लॉकडाउन खुलते ही 8 जून को ढाने की ओपनिंग कर डाली और नामकरण भी हो गया आत्मनिर्भर ढाबा।

बड़े डीके बिष्ट का फॉयल मैनुफैक्चरिंग का छोटा-मोटा काम था। लॉकडाउन में दिल्ली से आने वाला रॉ-मटीरियल नहीं आ पा रहा था जिसकी वजह से परिवार के खर्च तक निकालने में दिक्कत आ रही थी।छोटा भाई मुकेश वन विभाग के फतेहपुर रेंज में दैनिक श्रमिक था। मुकेश बताते हैं कि 8 हजार 200 रुपये तनख्वाह पर वह दो साल से वन विभाग में काम कर रहे थे। लेकिन यह तनख्वाह आठ से नौ महीने रुकने के बाद मिलती थी। इसकी वजह से दो बेटियों के इस पिता के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था।

लॉक डाउन के दौरान दोनों भाईयों ने पीएम मोदी संदेश टीवी के जरिए सुना और बेहद कम निवेश में ढाबे की शुरुआत कर डाली। दोनों भाई शुरुआती चार दिनों में ग्राहकों से मिले प्यार से खासे उत्साहित हैं।

बिष्ट बंधु बताते हैं कि आत्मनिर्भर ढाबे की शुरुआत के लिए उन्हें चालीस हजार रुपये खर्च करने पड़े। इनसे उन्होंने ढाबे के काउंटर से लेकर बर्तन, गैस और जरूरी चीजें खरीदीं.आत्मनिर्भर ढाबे में ग्राहकों को चाय से लेकर रोटी-सब्जी, राजमा-चावल, पहाड़ी आलू के गुटके, खीरे का रायता, भांग की चटनी, चटपटे छोले और ट्रेडिशनल चिकन खाने को मिल रहे हैं।