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पलायन रोकने को कैसे हो स्थानीय संसाधनों का विकास: ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित  
May 28, 2020 • SANJEEV SHARMA
नवल टाइम्सः  कोरोना महामारी के कारण विभिन्न राज्यों से बडी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डवासी वापस अपने गाँव आ रहे है। राज्य सरकार द्वारा प्रवासी लोगो के लिए योजनाएं तैयार की जा रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ड्रीम्स संस्था द्वारा एक अभिनव प्रयोग किया गया।
प्रवासी लोग अपने गाँव में रहकर ही रोजगार को अपनाए और इस रिवर्स पलायन के बाद पुनः पलायन को कैसे रोका जायए इसके लिये ड्रीम्स संस्था द्वारा समाज के विभिन्न बुद्विजीवियों एवं विषय विशेषज्ञों के साथ ऑन लाइन वीडियो से चर्चा की गई। चर्चा का विषय ष्ष्कोरोना काल में रिवर्स पलायन के पश्चात् पुनः पलायन रोकने हेतु कैसे हो स्थानीय संसाधनों का विकासष्ष् रखा गया था।
संस्था के महासचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि संस्था का यह प्रयास सफल रहाए पिछ्ले एक सप्ताह में हर रोज एक वीडियो जारी किया गया। जिसमें समाज के विभिन्न बुद्विजीवियों एवं विषय विशेषज्ञों के ऑन लाइन वीडियो भेजकर अपने विचार व्यक्त किये गये। प्रथम उद्बोधन अनूप नौटियालष् ने उत्तराखंड में पलायन के असर के बारे में बताते हुए विभिन्न प्रकार के पलायन के आंकड़े दिये। उन्होंने कहा कि पलायन को रोकने में सरकारें नाकाम रही है।
वर्तमान सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया। श्री नौटियाल ने पलायन आयोग की रिपोर्ट के आंकड़े अपने विचारों के माध्यम से रखेए इस कोरोना अवधि में उन्होंने 10 जिलों में अब तक 69360 लोगों के वापस आने की बात कहीं थी। उन्होंने लौटे हुए लोगों के प्रति चिंता जता कर सरकार से जल्दी योजना बनाने और लागु करने पर जोर दिया। दूसरे सम्बोधन में शिक्षक संघ के कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने भी सरकार से मांग की कि योजनाएं शार्ट टर्म हों और जल्दी से लागु होंए उन्होंने कहा कि लौटे लोगों को योजनाओं की जानकारी एवं उनके लायक कार्य के प्रति उन्हें जानकारी एवं मार्ग दर्शन जल्दी से एवं गंभीरता से देने की आवश्य्कता है।
उन्हें किसानों को तकनिकी ज्ञान देने एवं खेतोँ की चैकबंदी करने की दिशा में काम करने को कहा । श्री घिल्डियाल ने कहा कि लौटा व्यक्ति स्किलड हो सकता हैए तो यहां पर सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने इंडस्ट्रियल हैम्प यभाँगद्ध की खेती करवाने पर जोर दिया जो कि बहुत अधिक महंगी बिकती है और जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके अलावा दवाई हेतु उपयोगी कंडाली और बिजली बनाने हेतु पहले से ही प्रचुर मात्रा में पाई जाने चीड़ का सदुपयोग करवाने पर जोर दिया।