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मां बनने वाली महिलाएं को रखनी चाहिये सावधानी , डा. सुजाता संजय
July 25, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

देहरादूनः संजय ऑर्थोपीड़िक,स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर, जाखन, देहरादून द्वारा आयोजित एक दिवसीय ऑनलइन वेविनार में गर्भपात की समस्याओं पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई।

इस वेविनार में उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब से 340 से अधिक मेडिकल व नर्सिंग छात्रों ने भाग लिया। ऑनलाइन कार्यशाला के दौरान डॉ0 सुजाता संजय ने कहा कि, माँ बनना एक तकलीफदेह, लेकिन सुखद एहसास है। अगर गर्भवती महिलाएं सतर्क रहें तो समय रहते लक्षणों को पहचानकर गर्भपात के खतरे से बचा जा सकता है।
डॉ० सुजाता के अनुसार, जब महिला पहली बार मां बनती है तो उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ नहीं पता होता। वह गर्भावस्था को लेकर खुश और उत्साहित तो होती है, लेकिन अपना और बच्चे का कैसे ध्यान रखना है, यह जानकारी उसे नहीं होती। अपनी ओर से पूरा ध्यान रखने के बावजूद कई बार दुर्भाग्यवंश गर्भपात हो ही जाता है।

ऐसे में महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि वह गर्भपात के संकेतों को पहचानें और समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर लें। डॉ० सुजाता संजय ने सेमीनार के दौरान बताया कि यह एक अफसोस की बात है, कि गर्भपात का गर्भावस्था परीक्षण के बाद पता चलता है। एक शोध के अनुसार पाँच में से एक गर्भवती महिलाओं में गर्भपात होने की सम्भावना होती है। यह देखा गया है कि कुछ स्वस्थ महिलाओं को भी गर्भपात होता है। कुछ महिलाओं में गर्भपात के बारे में नियमित प्रसवपूर्व मुलाकात के दौरान पता चलता है जब डॉक्टर को शिशु की धड़कन नहीं मिलती। इसे मिस्ड मिस्कैरेज कहा जाता है।

कभी-कभी महिलाओं को प्रसवपूर्व जाँच के लिए जाने तक पता नहीं होता है कि उनका गर्भपात हो गया है। यदि गर्भपात हो गया है तो उसका पता अल्ट्रासाउंड से ही चल सकता है। गर्भपात के मुख्य कारणों में असामान्य कोमोजोम, वायरस के इन्फैक्शन और एडोकाइन की बीमारियां होती है। इसके अलावा यौन संचारित संक्रमण जैसे कि क्लैमाइडिया, या फिर और पॉलीसिस्टिक अंडाशय का दोष, धूम्रपान, मदिरापान और कोकीन, जैसे ड्रग्स एवं कैफीनध्कॉफी गर्भपात का कारण बन सकते हैं अधिक वजन होना, मधुमेह या थॉयराइड का अनियंत्रित होना, चिपचिता खून (स्टिकी रक्त सिंड्रोम), या एंटी फोस्फो लिपिड सिंड्रोम, जो रक्त के थक्के रक्त वाहिकाओं में बनाने लगता है गर्भपात के कारण हो सकते हैं। साधारण बुखार, मलेरिया होना तथा गर्भवती महिला का पेट के बल नीचे गिरना भी गर्भपात की संभावना को बढ़ा देती है। आमिनोसेंटेसिस से महिलाओं का गर्भपात हो सकता है। सीवीएस, जो गर्भावस्था के लगभग 12वें हफ्ते में की जाती है, एक और दो प्रतिशत महिलाओं में गर्भपात का कारण बन सकता है। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में के निचले हिस्से में दर्द होना, बार-बार पेशाब के लिए जाना और पेशाब करते समय निचले हिस्से में दर्द होना, सफेद और गुलाबी रंग का बहुत ज्यादा डिस्चार्ज होना, भ्रूण का मूवमेंट बंद होना, गर्भपात के लक्षण होते है ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

वजन गिरावट आना, ब्रेस्ट का कड़ा होना, मितली आना, हाईब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी में समस्या भी गर्भपात के लक्षण हैं। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने महिलाओं के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना जरूरी हो जाता है कि वे जो कुछ भी खाएंगी, वह उनके मुंह और फेफड़ों द्वारा गर्भ में पल रहे उनके बच्चे तक पहुंचेगा। बाद का गर्भपात लगभग 1 प्रतिशत महिलाओं में होता है।