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लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
September 10, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ
कोरोना के कारण लागू किये गए लॉकडाउन के दौरान आरबीआई ने ऋण धारकों को 6 महीने के लिए कर्ज़ की ईएमआई न चुकाने की छूट दी थी। लेकिन लोन मोरेटोरियम की इस अवधि में ब्याज पर कोई राहत नही दी गयी थी। इस दौरान कर्ज़ पर बैंकों की तरफ से ब्याज पर कंपाउंड इंटरेस्ट भी लगाया जाना था।
इसी अतिरिक्त ब्याज के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में कुछ याचिकाएं दायर हुई थी। आज हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और आरबीआई का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार बैंकों के लोन पर एक व्यापक योजना बना रही है। इसके लिए दो तीन राउंड की बातचीत भी हो चुकी है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार सभी पक्षों से बात कर कोई ठोस निर्णय लेगी। इसमें थोड़ा समय लग सकता है। लिहाजा दो हफ्तों के लिए सुनवाई टाल दी जाए।
उधर इंडीयन बैंकिंग एसोसिएशन की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने बैंकों द्वारा मोरेटोरियम अवधि में लगाये गए कंपाउंड इंटरेस्ट का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इसके विषय मे कर्ज़ देने की शर्तों में उल्लेख होता है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार कर्ज़ धारकों को राहत देने की जो बात कर रही है उससे 95 प्रतिशत लोन लेने वालों को कोई लाभ नही मिलेगा।
इसके बाद जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता में सुनवाई कर रही तीन जजों की बैंच ने कहा कि मामले की सुनवाई को आखिरी बार टाला जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि हमे कर्ज़ धारकों के हितों का ध्यान रखना है। इन याचिकाओं की सुनवाई पूरी होने तक पूर्व में जारी किया गया
अंतरिम आदेश लागू रहेगा जिसके तहत अगले दो महीनों तक बैंक न तो किसी कर्ज़ धारक का खाता एनपीए कर सकते है और न ही उसकी सिबिल रेटिंग खराब कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंक वसूली के लिए सख्ती न करें। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।