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क्या कोरोना वायरस से मास्‍क पहनना ही है बचावः क्या कहती है वैज्ञानिक शोध
June 18, 2020 • SANJEEV SHARMA

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संजीव शर्मा, नवल टाइम्सः  कोविड-19 को लेकर नए खुलासे ने दुनियाभर में लोगों की च‍िंता बढ़ा दी है। ताजा शोध में पता चला है क‍ि कोरोना वायरस मास्‍क पहनने और तीन फुट की दूरी रहने के बाद भी इंसान के शरीर में घुस जा रहा है।

कोरोना वायरस के कहर के बीच इस महामारी से बचाव के लिए पूरी दुनिया में मास्‍क और फेसशील्‍ड पहनने पर जोर दिया जा रहा है। साइप्रस के यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिया के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह खुलासा चौकाने वाला है।

उन्‍होंने मास्‍क पहनने के बाद भी 6 फुट की दूरी बनाए रखने की अपील की है। वैज्ञानिकों का यह अध्‍ययन ऐसे समय पर आया है जब दुनियाभर में उद्योगों की तरफ से सरकार पर दबाव डाला जा रहा है कि वे सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों में ढील दें।

ताजा शोध के अनुसार मास्‍क पहनने और 3 फुट की दूरी रहने पर के बाद भी कोरोना वायरस शरीर में घुस जा रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि अगर कोई कोरोना संक्रमित व्‍यक्ति लगातार खांस रहा है तो मास्‍क पहनने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

इस शोध के सह लेखक दिमित्रिस डिकाकिस ने कहा कि केवल मास्‍क कोरोना वायरस से संक्रमित होने से नहीं रोक सकता है। उन्‍होंने कहा कि कुछ ड्रापलेट मास्‍क शील्‍ड के अंदर घुस जाने में सक्षम हो जाते हैं। यही नहीं पीड़‍ित मरीज के ड्रापलेट 4 फुट तक जा सकते हैं। हालांकि इनमें से ज्‍यादातर एक मीटर यानि 3 फुट तक ही जाते हैं।

शोध में पता चला है कि मास्‍क हवा में पाए जाने वाले कोरोना वायरस के ड्रापलेट के संक्रमण को कम कर देता है लेकिन पूरी तरह से उसका खात्‍मा नहीं करता है। हालांकि बिना मास्‍क के ड्रापलेट करीब 6 फुट की दूरी तक चला जाता है। इसलिए जब तक कुछ और विकल्प या रोक थाम की दवा नही मिल जाती मास्‍क, कोरोना के खतरे को कम करने में मददगार है।

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