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कुलदीप सैनी की कविताः था मेरा एक साया
July 14, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ • abhivyakti

रचना मेरे जीवन कीः था मेरा एक साया

"समय के पास समय के साथ"
 साया था एक मेरे साथ,  
रहता था मैं उसके साथ 
रखता था ध्यान मेरा वह
टोकता था मुझे बार-बार 
जिस दिन ली, मैंने अंगड़ाई
खुश बहुत था वह उस दिन 
छोड़ गया वह मुझको अकेला 
जब मेरे पास थी, तन्हाई।
रोया बहुत था मै, पर उसने ना सुनी, 
अपने साथ ले गया मेरा दर्द भी 
मैं समझ नहीं पाया कि कौन है वो 
मेरा साया, जो मेरे साथ था 
पर अब वह बहुत दूर था 
मैंने भी सिखा उससे जीना पर 
अब साथ नहीं था साया मेरा 
वह दूर गया मेरे लिए 
कभी नहीं पास बुलाया 
रोता रहा मैं पर समझ ना पाया 
क्या सिखाना चाहता था वो, 
था मेरा एक साया 
पर बात हुई ज़ब उनकी दिल मेरा रोया

रोता रहा मैं पर समझ ना पाया

था मेरा एक साया ,था मेरा एक साया ......

  रचनाकारः कुलदीप सैनी , हरिद्वार