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कुलदीप सैनी द्वारा रचित कविता "अब करूंगा इन पर प्रहार"
October 5, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

कुलदीप सैनी द्वारा रचित , रचना मेरे जीवन की, के अन्तर्गत कविता "अब करूंगा इन पर प्रहार"

इस कविता में एक माँ अपने बेटे को जो कि पहली बार नौकरी के लिये जारहा है, कसम देती है की वह किसी के साथ कुछ गलत ना करे। वह उसको नौकरी के नियम सिखाती है कि किस तरह से कार्य करना है क्योंकि लड़का बहुत गुस्सा करने वाला,  और गलत देख कर उसके ऊपर बोलने वाला होता है, माँ को डर है की वह चुप कैसे रहेगा इसके लिए कसम की डोर से बांधती है
लड़का अपनी बात सुना कर कसम को वापस लेने के लिए कहता है इस सबको कविता के माध्यम से कुलदीप सैनी ने व्यक्त किया है......

माँ -

मत करना तू विरोध किसी का 
करना सिर्फ अपना काम 
चुप  रहकर सीख़, 
आटे में नमक को डाल
कोई कहे तुझे काम, 
मत कर तू इंकार, 
अपनी क्षमता को देदे , एक नई ढाल 
बेटा -  
मैं चुप रह कर कब तक करूं काम, 
तूने तो कहा था आटे मे नमक डाल, 
जब नमक मे आटा डले तो क्या करू मैं काम, 
क्या  भविष्य होगा, कैसे  करूं इससे इंकार, 
दुःख होता है जब, रोती अम्मा आये, 
तू ले पैसे मेरे भी, तू काम जब मेरा कराये, 
ऊपर से होती गलती, तो मैं क्या सुनाऊं, 
मैं अपने पर ही  क्रोध की सीमा पर जग जाऊ 
कब तक चुप बैठूं बता तू, 
कर तू  मेरे मन का मान, 
नहीं सह सकता अब इनका प्रहार, 
रोते आदमी को देख चीख मेरी आये, 
पानी के बदले, आँसु मेरे नयन से आये 
क्या भारत बनेगा महान, 
जब होंगे यह काम? 
कसम तोड़ तू मेरी कर मुझ पर एक उपकार, 
नहीं चुप बैठूंगा अब करूंगा इन पर प्रहार।

अब करूंगा इन पर प्रहार, अब करूंगा इन पर प्रहार।