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किसने कहा,प्रवासी मजदूरों की घर वापसी पर सियासत नहीं बल्कि सहानुभूति होनी चाहिये
May 16, 2020 • SANJEEV SHARMA

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नवल टाइम्सः  परमार्थ निकेतन में आज सोशल डिसटेंसिंग का गंभीरता से पालन करते हुये कोरोना काल में सड़क हादसों में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूर भाई-बहनों की आत्मा की शान्ति के लिये विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। स्वामी जी ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों से निवेदन किया कि जो लोग अपने घरों में है वे इस समय सुरक्षित हैं, परन्तु जो लोग सड़कों पर भटक रहे हैं, जो प्रवासी मजदूर अपने घर वापसी के लिये सैकड़ों किलोमीटर, छोटे-छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, उनकी व्यथा और वेदना असहनीय है।
हर व्यक्ति मुसीबत के समय अपने परिवार के पास जाना चाहता है, यही चाहत उन मजदूरों की भी है। उनके पास अभी रोजगार नहीं है, बेरोजगारी और बेबसी से परेशान प्रवासी मजदूर घर पहुंचने की जिददोजहद में अपनी जान गंवा रहे हैं, यह अत्यंत हृदयविदारक है। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी पर सियासत नहीं बल्कि सहानुभूति होनी चाहिये। पिछले कुछ दिनों से प्रवासी मजदूर सड़क हादसों के शिकार हो रहे हैं, आज तड़के यूपी के औरेया में हुये सड़क हदसे में 24 मजदूरों ने अपनी जान गंवा दी, ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे। हाइवे पैदल चल रहे मजदूरों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ना पड़ रहा है, मेरा निवेदन है केन्द्र और राज्य की सरकारों से कि सबसे पहले प्रवासी मजदूर जो घरों की तरफ पलायन कर रहे हैं उन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये।
स्वामी जी ने कहा कि प्रथम और दूसरे चरण के लाॅकडाउन के समय में प्रवासी मजदूरों ने अपने संयम का परिचय दिया, जो जहां पर थे वहीं रूके रहे परन्तु अब लगता है कोरोना वायरस का बढ़ता संकट उनके संयम पर हावी हो रहा है, इसलिये सबसे पहले हमारे मजदूर भाई-बहनों की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने वाले हमारे मजदूर आज बेबस दिखाई दे रहे हैं। मजदूरों के दर्द को पहचानना होगा। स्वामी जी ने कहा कि भारत में औद्योगिक का्रन्ति आयी जिसके कारण हमारा विकास चरम पर पंहुचा परन्तु भारत की असली चमक मजदूरों के पसीन से ही है। भारत को चमकाने में मजदूरों का अहम योगदान है, अतः मजदूरों की बेसब्री और खोते संयम पर विशेष ध्यान देना होगा। भारत का मजदूर वर्ग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इस बात को स्वीकार करना होगा और उनके अस्तित्व को बचाने के लिये सर्वसम्भव प्रयास करने होंगे। मुझे तो लगता है प्रवासी मजदूरों को इस समय पैकेज और पैकेट के साथ सुरक्षित पहंुचाने की भी सबसे ज्यादा जरूरत है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि कोरोना संकट से आज पूरी दुनिया दहशत में है। कोरोना एक बेजान और अदृश्य वायरस है जो आर्थिक मंदी तो ला सकता हैंय हमें आर्थिक रूप से तोड़ सकता है परन्तु हमारे मनोबल को नहीं तोड़ सकता। कोरोना का इलाज बचाव, जागरूकता और जिम्मेदारी में निहित है। आईये स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निदेर्शो का पालन करें और कोरोना की जंग को जीतने में सरकार की मदद अवश्य करें।