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किसने और क्यों, किया चारधाम यात्रा का विरोध
June 13, 2020 • SANJEEV SHARMA

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नवल टाइम्सः  देवस्थानम बोर्ड की ओर से गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ करने के निर्णय को लेकर गंगोत्री तीर्थ पुरोहितों ने कड़ा विरोध जताया है। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि उत्तराखंड के यह चारों धाम वर्तमान में कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। यदि यहां पर यात्रा प्रारंभ की जाती है तो धामों में पूजा कार्य में लगे रावल एवं पुजारियों के संक्रमित होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इससे अनादि काल से चली आ रही परंपरा के प्रभावित होने का खतरा होगा। यूकेडी ने भी चारधाम यात्रा शुरू करने पर विरोध जताया है।

शनिवार को गंगोत्री पांच मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को एक ज्ञापन प्रेषित किया। जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में जो तथ्य पेश किए गए हैं, उसमें सांईं मंदिर ट्रस्ट का भी जिक्र किया गया है, जिसका वह कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यात्रा व्यवस्थाएं,मंदिर प्रबंधन एवं संचालन यहां की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार होती है। लेकिन उसके बाद भी यहां के पौराणिक एवं धार्मिक महत्व के मंदिरों को साईं बाबा मंदिर ट्रस्ट से जोड़ कर देखा जा रहा है। पुरोहितों ने कहा कि उत्तराखंड के चारों धाम मोक्ष के धाम हैं, जहां पर सभी जाति के लोग देश विदेश से आकर अपने पूर्वजों का पिंडदान श्राद्ध एवं तर्पण करते हैं। ऐसे में इन पवित्र मंदिरों को सांई ट्रस्ट की तर्ज पर संचालित एवं प्रबंधन किया जाना सर्वथा अनुचित है । जिसका वह पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से संबंधित प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में देवस्थानम बोर्ड द्वारा निर्णय करना एवं आदेशित किया जाना अनुचित है। मंदिर समिति के सह सचिव राजेश सेमवाल ने बताया कि यदि इसके बाद भी देवस्थानम बोर्ड इसी तरह के आदेश निर्गत करता रहा तो वह सभी तीर्थ पुरोहितों को मजबूर होकर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने भी चारधाम यात्रा प्रारंभ करने का विरोध जताया है। उन्होंने तीर्थ पुरोहितों का समर्थन देते हुए उनकी मांगों को जायज बताया।