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खटीमा गोली कांड की 26वीं बरसीः 7 आंदोलनकारियों ने दी थी शहादत
September 1, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ


नवल टाइम्स, हरिद्वारः खटीमा गोली कांड की 26वीं बरसी शहीदों के सपनों के उत्तराखंड का आज भी है इंतजार। 1 सितंबर 1994 को उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर खटीमा की सड़कों पर हजारों उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर बरसी गोलियों को 26 वर्ष हो गए हैं। पृथक उत्तराखंड की मांग को लेकर खटीमा गोलीकांड में 7 आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी थी। इतने त्याग के बावजूद जो उत्तराखंड मिला क्या वह शहीदों के सपनों का उत्तराखंड है।
खटीमा गोलीकांड में 7 आंदोलनकारियों शहीद हो गये तथा 200 सों से अधिक आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे।  2 सितंबर 1994 को मंसूरी में पुलिस ने आंदोलनकारियों के धरना स्थल पर कब्जा कर कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया था, विरोध कर रहें आंदोलनकारियों पर पुलिस ने विना चेतावनी के गोली चलाई जिममें बेलमती चौहान, राम सिंह बंगारी, हंसा धनाई, मदन मोहन मंमगाई, बलवीर सिंह नेगी वह धनपत सिंह शहीद हो गये थे।
महिला आंदोलनकारियों पर पुलिस ने अत्याचार किए, उसके बावजूद महिलाएं आज भी अपने राज्य में अपनी अस्तित्व के लिए लड़ रही है। उत्तराखंड की जनता का मानना है कि जिस मकसद से उत्तराखंड राज्य बना था वे पूरा होता नहीं दिख रहा है।
उत्तराखंड राज्य को बनें भले ही 20 साल हो गये हो लेकिन उत्तराखंड की जनता को अपने सपनों के इस उत्तराखंड के बनने का अभी इंतजार करना पड़ेगा।
 श्रद्वान्जली देने वालों मे उत्तराखण्ड क्रांति दल के उदय राम सेमवाल, सत्यप्रसाद भट्ट व उत्तराखंड क्रांति दल के अन्य सदस्य रहे।