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कैसे बढ़ाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमताः डॉ. प्रताप चौहान
March 25, 2020 • SANJEEV SHARMA • स्वास्थ्य
नवल टाइम्सः   जीवा आयुर्वेद के निदेशक डॉ. प्रताप चौहान ने कहा कि ‘‘घबराएं नहीं। भय और नकारात्मकता से शरीर की रोग प्रतिरक्षण क्षमता कम होती है। अधिक मानसिक तनाव हमारे पाचन को भी प्रभावित करता है और इस तरह ‘‘अमा’’ का निर्माण होता है। यह विषाक्त चीज है जो कई बीमारियों को पैदा करने के लिए जिम्मेदार है।’’
नोवेल कोरोनावायरस (कोविड 19), जिसे वुहान वायरस के रूप में भी जाना जाता है, ने काफी लोगों को संक्रमित किया है। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें।
डॉ. चौहान ने कहा, ‘‘स्वच्छता बनाए रखना वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं, सेनेटाइजर का उपयोग करें, छींकते समय नाक को ढंकें और व्यस्त और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। घर और वातावरण को कीटाणुओं से मुक्त रखने के लिए घर में अग्निहोत्रज्ञ करें या हवन समाग्री (जड़ी-बूटियों का मिश्रण) जलाएं।
शरीर को किसी भी प्रकार के बाहरी चीजों या किसी बीमारी से लड़ने के लिए मजबूत प्रतिरक्षण क्षमता जरूरी है। कोरोना वायरस मुख्य रूप से फेफड़ों और श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। रोजाना एक चम्मच च्यवनप्राश खाने से इम्युनिटी बढ़ती है, खासकर फेफड़े और श्वसन प्रणाली की। अमलकी या अमाला (इम्बलिका आफिसिनालिस), गुडुचीध्गिलोय (तिनसपोरा कोर्डिफोलिया), नीम (अजाडिरचता इंडिका), कुतकी (पिक्रोरहिजा कुरोआ), तुलसी (पवित्र तुलसी) कुछ ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ हैं जो प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण और संक्रमण को रोकने में सहायक है। आयुर्वेद में, एक अच्छा पाचन या मजबूत पाचन क्षमता रोगों से लड़ने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ताजा अदरक खाना और अदरक की चाय, पुदीने की चाय, दालचीनी की चाय और सौंफ की चाय पीना भी अच्छा होता है।
डॉ.चौहान ने कहा, “आप यह नुस्खा बना सकते हैं। एक लीटर पानी लें और उसमें एक-एक चम्मच-सौंफ, जीरा, धनिया पाउडर और ताजा कसा हुआ अदरक डालें। कुछ मिनट के लिए सब को एक साथ साथ उबालें, उसे छान लें और एक थर्मस में भर कर रख ले। इसे थोड़घ-थोड़ा करके दिन भर पीते रहें।” संतरे, अंगूर, नींबू जैसे खट्टे फल विटामिन सी के समृद्ध स्रोत हैं और इनका सेवन करना अच्छा है। एक कप गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ लें और दिन में दो से तीन बार पिएं। गर्म पानी पीना लाभदायक है। यह आपको हाइड्रेट रखने में मदद करता है। आयुर्वेद में, नाक, गले, साइनस और सिर के लिए नास्य चिकित्सीय उपचार है। डॉ. चैहान ने कहा, ‘‘प्रत्येक नथुने में तिल के तेल की 2-3 बूंदें डालें और नाक के जरिए सांस लें। इससे न केवल नाक और गले के मार्ग लुब्रिकेट होंगे बल्कि भीतरी म्युकस मेम्ब्रेन भी मजबूत होगा और बाहरी चीजों को बाहर रखने में मदद मिलेगी।’’