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जल संस्थान के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठते सवाल
August 17, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

जल संस्थान में गुम हुए रिकार्ड के मामले में हुआ नया खुलासा: जिस प्राथमिकी दर्ज कराने का विभाग कर रहा है दावा , पुलिस ने कहा मामले में दर्ज नहीं हैं एफआईआर  

ब्यूरो एन टी न्यूज़,हरिद्वारः उत्तराखण्ड जल संस्थान में वर्ष 2003-04 मे तैनात आठ दैनिक वेतनभोगी कार्मिकों के नियमितीकरण व कार्मिकों से संबंधित अन्य रिकार्ड गायब होने के मामले मे एक और नया खुलासा हुआ हैं।

आप को बताते चलें की यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता इन्द्रमोहन सिंह रावत के सूचना का अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी से हुआ।

जल संस्थान के अधिकारी जिस थाने में आठ दैनिक वेतनभोगी कार्मिकों के नियमितीकरण व कर्मिकों से संबंधित अन्य रिकार्ड गायब होने की एफआई आर दर्ज होने का दावा कर रहे थे , उस पर थाना नेहरू कालोनी देहरादून की पुलिस ने 30.06.2018 को जल संस्थान के द्वारा किसी भी एफआईआर दर्ज होने से साफ इंकार कर दिया हैं। जबकि राज्य सूचना आयोग में जल संस्थान के लोक सूचना अधिकारी / सचिव प्रशासन के द्वारा पत्रांक-4386/ कार्मिक /01 / सू0का अधि0.अधि0-2005/2019-20 दिनांक 01.11.19 लिखित में दिए गए जबाब में साफ-साफ विभागीय कार्यालय से गायब पत्रावलियों के संबंध में 30.06.2018 को थाना नेहरू कालोनी में एफआईआर करने का उल्लेंख किया हैं।

अब सवाल उठता हैं कि जब थाना ही एफआईआर दर्ज नहीं होने की बात कह रहा तो जल संस्थान के अधिकारियों ने गायब पत्रावलियों के मामले में द्वितीय अपील की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त को दिए गए लिखित जबाब में थाना नेहरू कालोनी में एफआईआर दर्ज कराने दावा किस आधार पर? और क्यूं किया ? कहीं विभागीय अधिकारियों का दोेषियों को करवाई से बचाने का प्रयास तो नहीं चल रहा था ?

दरअसल, पत्रावली गायब होने के मामले की जानकारी आयोग में हुई थी । राज्य सूचना आयोग ने अपीलार्थी रावत को  वर्ष 2003-04 मे तैनात आठ दैनिक वेतनभोगी कार्मिकों के नियमितीकरण व कार्मिकों से संबंधित अन्य रिकार्ड की सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने पर विभागीय लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओं नोटिस जारी किया था। इसी दौरान यह जानकारी सामने आई थी।

पत्रावली गायब मामले को सूचना आयुक्त ने भी गंभीर माना था, और दोषियों के विरूद्ध जांच कर आवश्यक विभागीय कारवाई के दिशा निर्देश दिए थे। लेकिन, बावजूद उसके जल संस्थान के अधिकारियों का रवैया पूरे मामले में लीपापोती करने भर का नजर आ रहा हैं। जिसकी गवाही खुद थाना नेहरू कालोनी देहरादून से सूचना का अधिकार में मिली जानकारी बयां कर रही हैं। जिसके बाद इस मामले को लेकर जल संस्थान के विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।