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हरितालिका तीज क्यों और कैसे मनायी जाती है
August 21, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ • ज्ञानवर्धक जानकारी

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनायी जाने वाली हरितालिका तीज को सबसे बड़ी तीज माना जाता है। इस दिन को भगवान शंकर और पार्वती के विवाह के रूप में मनाया जाता है।

सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रख कर अपने पति के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के साथ ही अखंड सुहाग की कामना करती हैं। हरितालिका जीत पर शिव-पार्वती पूजन के लिए मंडप तैयार कर विभिन्न प्रकार के फूलकृपातियों से सजाया जाता है। इस मंडल में रेत का शिवलिंग बना कर अखण्ड दिया जलाया जाता है।

तीज के अवसर पर हर बार बड़े स्तर पर मंडल बना कर महिलाएं सामुहिक पूजन भी करती हैं लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते बड़े आयोजन नहीं हो रहे हैं। हरितालिका तीज पर तृतीया तिथि में माता पार्वती ने घने जंगल में भगवान शिव का रेत का शिवलिंग बना कर उनका ध्यान किया था। जिस पर उन्होंने प्रसन्न हो कर पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। देवी पार्वती ने इस निर्जला व्रत को करने के साथ ही पूरा दिन पूजन और रात्रि को जागरण किया था। इसी तरह से महिलाएं भी रेत का शिवलिंग बना कर पूजन करती हैं और रात के समय जागरण कर भजन-कीर्तन भी करती हैं।