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डॉ उषा खंडेलवाल की कविताः 'जीवन का मूल्य पहचान सखे'
August 5, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

डॉ उषा खंडेलवाल की कविताः  'जीवन का मूल्य पहचान सखे'

जीवन का मूल्य पहचान सखे
     
धरती से अंबर तक , कोहराम मचा कोरोना का,
घर में हो या बाहर, सब ओर तहलका कोरोना का,

कब कौन, किस जगह , इससे घिर आए नहीं जानता कोई ,
इसने न छोड़े हिंदू , मुस्लिम , सिक्ख , ईसाई , जैन पारसी , बुद्ध , बहाई ,
अब वक्त आ गया, समय को पहचान सखे। 
अब जिंदगी का नहीं , कोई ठिकाना सखे ।
मन कहता है अब तो सत् पथ पर चललें ।
नहीं तो पछताना लगेगा हाथ सखे , 
दुनिया में बढ़ती भ्रष्टाचारी ,
चोरी, बेईमानी को रोक सकें तो रोक लें ।
पीड़ित मानवता की सेवा सद्भावना से कर लें ।
श्रम, सहयोग , सेवा , साधना का पाठ पढ़ लें ।
समय कम काम अधिक है , यह विचारणा कर लें ।
यूं उम्र से तो हर दिन एक दिन कम होता जाएगा ।
हम भी अपना कुछ कर्तव्य निभा सकें तो निभा लें ।
इस धरती के किसी कोने या हिस्से को तो रोशन कर दें ,
यह मानव जीवन अनमोल मिला उपहार है ,
परमात्मा का हम पर बड़ा उपकार है ,
इस जीवन का कुछ तो मान रख लें ,
कुछ अपना कुछ देश का भला तो कर लें ,
धन्य हुए वही है इस जगत में , 
जिसने अपनी आत्मा का मूल्य है पहचाना ,
और संदेश दिया जग को, एक दिन यह माया नगरी है छोड़कर जाना ,
 चाहे हो या ना हो कोरोना ।।
 चाहे हो या ना हो कोरोना ।।
 चाहे हो या ना हो कोरोना ।।
   

        रचयिता       
डॉ उषा खंडेलवाल ब्रह्म वादिनी       
  इंदौर (भूतपूर्व शांतिकुंज निवासी)

आप ने  "आध्यात्मिक मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रतिपादन" ' पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के समन्वयात्मक दृष्टिकोण के संदर्भ में ' विषय पर पी.एच.डी. में शोध की है जो कि आचार्य श्रीराम शर्मा के ऊपर विश्व का प्रथम शोध ग्रंथ है, जिसे डॉ अशोक जी खंडेलवाल ने सन 2000 में प्रकाशित कराया था। यह पुस्तक आज देव संस्कृति विश्व विद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है।

आपकी रुचि असहाय जनों की सेवा करना एवं अभावग्रस्त परिजनों की मदद करना मुख्य उद्देश्य रहा है और यही उद्देश्य लेकर आप आज भी चल रही हैं।