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द हंस फाउंडेशन कोरोना कोविड-19 प्रभावितों के लिए देशभर में चला रहा राहत अभियान
May 15, 2020 • SANJEEV SHARMA

नवल टाइम्सः कोविड-19 महामारी अभूतपूर्व अनुपातों वाली आपदा है और इसने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। यह एक ऐसा अदृश्य और सीमाहीन दुश्मन है जिससे मानव जाति का पिछले कुछ वर्षाें के इतिहास में पहले कभी सामना नहीं देखा गया है और इसके अनोखे परिणाम हैं। इसके फैलने से भारत भी किसी भी और दूसरे देश की तरह प्रभावित हुआ है। हालाँकि भारत में इसका फैलना और मृत्यु दर कुछ पश्चिमी के देशों जितना अधिक नहीं है और अमरीका में, संक्रमण के मामलों की संख्या समय के साथ लगातार बढ़ती जा रही है।

भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट, द हंस फाउंडेशन (टी.एच.एफ.) अपने सहयोगियों, उत्तराखंड सरकार, वरदान, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन, ग्रैविस, मासूम चैरिटेबल ट्रस्ट, आसरा ट्रस्ट, बी.ए.आई.एफ. डिवेलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन, गूंज, अक्षय पात्र फाउंडेशन और कई दूसरे सहयोगियों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों के लिए राहत एवं सहायता के अभियान चला रहा है। अस्पतालों और पहली पंक्ति के कर्मचारियों की मदद भी कर रहे हैं। 

इस समय राष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली अनेकों समस्याओं से निपटने के लिए बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, कोलकाता, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के आंतरिक क्षेत्रों में कमजोर समुदायों के लिए काम शुरू कर दिया गया है। अपने सहयोगियों के साथ यह फाउंडेशन प्रवासी लोगों के परिवारों, दिहाड़ी मजदूरों, अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को पोषक पदार्थों के किट, राशन के किट और पहली पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मचारियों को हेल्थकेयर किट, आधा वेतन और मेडी-क्लेम्स, वेंटिलेटर्स और आइसोलेशन केंद्र स्थापित करने में मदद भी कर रहा है।

उदारता के हर छोटे से छोटे काम के प्रभाव को बड़ा बनाने के लिए, द हंस फाउंडेशन ने कोविड-19 के राहत कार्य में दान किए गए हर एक रुपये के बराबर राशि देने का संकल्प लिया है। द हंस फाउंडेशन की अध्यक्ष श्वेता रावत ने इस पहल पर बोलते हुए कहा कि द हंस फाउंडेशन कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए बेहद सक्रिय और प्रेरित है। सरकारों, सहयोगियों और जन स्वास्थ्य प्रदान करने वाली संस्थाओं के अच्छे सहयोग और समर्थन के जरिए यह फाउंडेशन इस मुश्किल भरे समय में देश भर में खाद्य सुरक्षा, आजीविका का विकास मुहैया करा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निचले तबके वाले समुदाय इस मुसीबत से बच सकें।

 यह पूरी तरह से समझते हैं कि मिलकर इसका मुकाबला करने के लिए हमारे पास हिम्मत, धैर्य और पूरे संसाधन उपलब्ध हैं। सुरक्षा और स्वच्छता के सभी तौर-तरीकों का पालन करके, खाने के किट, स्वच्छता किट (एन -95 फेस मास्क, सैनिटाइजर्स, दस्ताने आदि) सुरक्षात्मक उपकरण, वेंटिलेटर्स, आदि के रूप में राहत सेवायें प्रदान करने के लिए द हंस फाउंडेशन काम कर रहा है। इसके अलावा, सिक्किम और उत्तराखंड में क्वारंटाइन के लिए आइसोलेशन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।