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चीन की फिर से घुसपैठ की कोशिश, सैनिकों में आमना-सामना
September 8, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो के पास रेजांग ला में पीएलए (चीनी सेना) ने एक बार फिर से घुसपैठ की कोशिश की। इस दौरान कई पीएलए सैनिकों की मौजूदगी थी। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मई महीने से जारी भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। चीनी सैनिक लगातार घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारतीय जवान ड्रैगन की कोशिशों को नाकाम कर दे रहे।

रेजांग ला में चीनी सैनिक लगातार ऊंचाई वाली चोटियों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय जवान उसे नाकाम कर दे रहे। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि रेजांग ला में दोनों देशों के जवानों के आमने-सामने आने के बाद भी दोनों पक्षों में तनाव को कम करने के लिए बातचीत जारी है।

इससे पहले, पीएलए ने सोमवार देर रात को आरोप लगाया था कि भारतीय सैनिकों ने एलएसी पार की और पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास चेतावनी देने के लिए गोलियां चलाईं। चीन के इस दावे को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था।

भारतीय सेना ने पीएलए के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उसने कभी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पार नहीं की या गोलीबारी समेत किसी आक्रामक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया। सेना ने कहा, 'यह पीएलए है जो समझौतों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है और आक्रामकता अपना रहा है जबकि सैन्य, कूटनीतिक एवं राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।'

सेना ने आगे कहा था कि सात सितंबर के ताजा मामले में, पीएलए के सैनिकों ने एलएसी के पास हमारे एक अग्रिम ठिकाने तक आने की कोशिश की और जब हमारे सैनिकों ने उन्हें रोका तो उन्होंने भारतीय सैनिकों को डराने के प्रयास में हवा में कुछ राउंड गोलियां चलाईं।

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण महौल को चार महीने से अधिक हो चुका है। मई की शुरुआत से ही चीनी सेना लगातार उकसाने की कोशिश कर रही है। चीनी सेना ने लद्दाख के कई इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की थी। इसके बाद, माहौल और तनावपूर्ण तब हो गया था, जब जून के मध्य में भारत-चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हिंसक टकराव हो गया था। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जबकि चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे।

वहीं, फिर 29-30 और 31 अगस्त को भी चुशूल सेक्टर में दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामने हुआ था। चीन ने घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने उसे नाकाम कर दिया था।