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भीख मांगकर गुजर करने वाली हंसी का दिया सरकार ने साथ
October 21, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

हरिद्वार, संजीव शर्मा, नवल टाइम्स न्यूज़ः  हरिद्वार में बहुत मुश्किल हालातो में गुजर बसर कर रहीं हंसी को आखिर सरकार का साथ मिल ही गया। हंसी को उत्तराखंड सरकार में महिला कल्याण विभाग को ज्वाइन करने का ऑफर दिया है। जहां पर उन्हें वेतन के साथ साथ रहने की भी निशुल्क सुविधा दी जाएगी।

यही नही हंसी अपने बच्चे को भी अच्छी एजुकेशन दे सकेगी। हालांकि राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर हंसी ने एक दिन का समय फैसला लेने के लिए मांगा है। मंगलवार को महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्य हंसी से मुलाकात करने हरिद्वार पहुंची। आपको बता दे कि हंसी कुमाऊं यूनिवर्सिटी में वाइस प्रेसीडेंट रह चुकी है और डबल एम.ए पास है। इसके बाद भी हंसी अपने जीवन यापन के लिए भीख माँगकर गुजारा करती थी। हंसी बड़े नेताओं के सामने भी चुनाव लड़ चुकी है। मीडिया में हंसी के हालातों की खबरों के आने के बाद राज्य सरकार ने उसकी सुध ली। 

जानिये क्या है कुमाऊं यूनिवर्सिटी में वाइस प्रेसीडेंट रह चुकी डबल एमए पास हंसी की पूरी कहानी जो हरिद्वार में मांग रही थीं भीख।

कुमाऊं यूनिवर्सिटी का कैंपस कभी हंसी प्रहरी के नाम के नारों से गूंजता था। प्रतिभा और वाकपटुता इस कदर भरी थी कि वाइस प्रेसीडेंट का चुनाव लड़ी और जीत गई। राजनीति और इंग्लिश जैसे विषयों में डबल एमए किया। तब कैंपस में बहसें हंसी के बिना अधूरी होती थीं। हर किसी को इस बात का यकीन था कि हंसी जीवन में कुछ बड़ा करेगी। पर समय का पहिया किस ओर घूमता है ये किसे पता, जोे लड़की कभी विवि की पहचान हुआ करती थी वह आज भीख मांगने के लिए मजबूर है। हरिद्वार की सड़कों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और गंगा के घाटों पर उसे भीख मांगते हुए देखने पर शायद ही कोई यकीन करे कि उसका अतीत कितना सुनहरा रहा होगा। 
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र के हवालबाग ब्लॉक के गोविंन्दपुर के पास रणखिला गांव में पली-बढ़ीं हंसी पांच भाई-बहनों में से सबसे बड़ी बेटी है। वह पूरे गांव में अपनी पढ़ाई को लेकर चर्चा में रहती थी। गांव से छोटे से स्कूल से पास होकर हंसी कुमाऊं विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया। हंसी पढ़ाई लिखाई के साथ ही दूसरी एक्टिविटीज में बढ़चढकर भाग लेती थी। साल 1998-99 में वह कुमाऊं विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन की वाइस प्रेसिडेंट बनी। 
हंसी के मुताबिक उन्होंने 2008 तक कई प्राइवेट जॉब भी की। 2011 के बाद हंसी की जिंदगी अचानक से बदल गई। उन्होंने साफ-साफ कुछ भी बताने से तो इन्कार कर दिया। क्योंकि वह नहीं चाहती कि परिवार के सदस्यों पर किसी तरह का भी फर्क पड़े।  हंसी ने बताया कि वह इस वक्त जिस तरह की जिंदगी जी रही हैं, वह शादी के बाद हुई आपसी विवाद का नतीजा है।  
दोबारा से जिंदगी की शुरुआत करने की हसरत शादीशुदा जिंदगी में हुई उथल-पुथल के बाद हंसी कुछ समय तक अवसाद में रहीं और इसी बीच उनका धर्म की ओर झुकाव भी हो गया।

परिवार से अलग होकर धर्मनगरी में बसने की सोची और हरिद्वार पहुंच गईं। तब से ही वो अपने परिवार से अलग हैं। वो बताती हैं कि इस दौरान उनकी शारीरिक स्थिति भी गड़बड़ रहने लगी और वह सक्षम नहीं रहीं कि कहीं नौकरी कर सकें। हालांकि अब उन्हें लगता है कि यदि उनका इलाज हो तो उनकी जिंदगी पटरी पर आ सकती है। वह दोबार से अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सकती हैं।  
हंसी ने बताया कि वह 2012 के बाद से ही हरिद्वार में भिक्षा मांग कर अपना और अपने छह साल के बच्चे का पालन-पोषण कर रही हैं। बेटी नानी के साथ रहती है और बेटा उनके साथ ही फुटपाथ पर जीवन बिता रहा है। फर्राटेदार इंग्लिश बोलने वाली हंसी जब भी समय होता है तो अपने बेटे को फुटपाथ पर ही बैठकर अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और तमाम भाषाएं सिखाती हैं। इच्छा यही है कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जीएं। इसके लिये उन्होने खुद कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखा कि उनकी सहायता की जाए। कई बार सचिवालय विधानसभा में भी चक्कर भी काटे ,इस बात के दस्तावेज भी हंसी के पास मौजूद हैं।