ALL विज्ञान स्वास्थ्य स्वाद समाचार ज्ञानवर्धक जानकारी जनहित abhivyakti
बस यूंहीः वर्तमान काल है कोरोना काल
May 28, 2020 • SANJEEV SHARMA

राशि सक्सैनाः हम अपने वर्तमान को कोरोना काल की संज्ञा दे सकते हैं, वस्तुतः ये दौर यूँ तो कई और विशेष बिंदुों से भी जाना जायेगा, सबसे ज्यादा तो कोरोना काल  एक तरह से सदी में सकारात्मक बदलावों को लाने के लिए याद किया जायेगा, पिछले कुछ दशकों से मानव केवल विकास के पीछे अँधा होके सिर्फ धनार्थ ही भाग रहा था।

इस दौड़ में वो मानवीय मूल्यों को भी दाँव पर लगा चुका था, प्रदुषण, एकाकी परिवार. रिश्तों में तनाव, और मानव अंतर् -मन की निराशा, इसी अंधदौड़ का परिणाम बनी, लेकिन जब से कोरोना ने मानव की गति पे लगाम कसी। तब से ही मानव जीवन को ये समस्याएँ भी कुछ कम हो गई, वो रिश्ते जो बिखरने लगे थे एक ही जगह रुकने से फिर सिमटने लगे हैं, पूरा परिवार साथ में व्यंजनों का लुफ्त लेते लेते फिर से भावनाओं में बांधने लगा है, बाज़ार बंद होने से आवश्यकताएं सिमटने लगी हैं।

एक अहसास हो रहा है की व्यर्थ की ज़रूतों को पूरा करने की कोशिश भी व्यर्थ थी, जो चिंता नहीं करने लायक थी उसके लिए बेकार ही शरीर को लापरवाही से अनेक बिमारियों के दलदल  में डाल दिया, अब रोज़ व्यायाम करने से उस शरीर को भी दुबारा पा रहे हैं, लोगो से कम्पटीशन के चक्कर में जो फालतू का दिखावा कर रहे थे और अपने मन को अशांत कर रहे थे वो भी अब नियंत्रित है, मनुष्य ही नहीं जानवर भी खुश हैं, नदियां भी खुश हैं, यद्यपि तस्वीर का दूसरा रुख ये भी है कि चूँकि लोगों कि दिनचर्या बदलने से सामाजिक और  आर्थिक बदलाव भी हुआ है जो दुखद है वो लोग जो किसी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में नहीं हैं उनके रोज़गार और आमदनी दोनों पर ही संकट हो गया है, जो आने वाले समय में निश्चित ही अपराधीकरण का  मार्ग प्रशस्त कर देगा, वैसे तो ये कहना अभी जल्दबाज़ी लगता है लेकिन इंसानी भूख सदियों से विवश हो कर ऐसे रास्ते पर ले आती है । जहाँ सही गलत समझना मुश्किल हो जाता है।

इसीलिए जरूरत अब कुछ ऐसे सोच-विचार  है कि हम इतनी विकसित सभ्यता के नागरिक हैं कि रोटी, कपडा और मकान जैसे मूल समस्याओं के समाधान आपस में थोड़ा सामंजस्य करके दे सकते हैं, तो अगर हम मानव मूल्यों को ध्यान में रखते  हुए कुछ प्रयास करें तो इस कोरोना काल के भी कुछ सुखगामी परिणामों के चलते इसे स्वर्णिम बना सकते हैं और इस कठिन दौर से बाहर आ  सकते हैं।

बस याद ये रखना है कि ये विकास का नहीं स्वरक्षा  का समय है, इस समय ज्यादा कमाने की जगह बचाने और मानव समाज के विकास की जगह मानव अस्तित्व को बनाये रखना ही प्रमुख ध्येय रहना चाहिए, अपने अपने घर में रहिये और अपने अपनों की भी रक्षा करिये,और कोरोना की जंग जीतिए।