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अवश्य जानियेः क्यों बहुत दुर्लभ है, 21 जून का यह सूर्य ग्रहण
June 19, 2020 • SANJEEV SHARMA

संजीव शर्मा, हरिद्वारः सूर्य ग्रहण अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा और दिलचस्प बात यह है कि ग्रहण का पीक भारत के उत्तरी हिस्से में दिखाई देगा, जो सुबह 10:25 बजे से शुरू होकर 12:08 बजे अधिकतम ग्रहण और 01:54 बजे समाप्त हो जाएगा। इससे पहले वलयाकार ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को दक्षिण भारत से और आंशिक ग्रहण के रूप में देश के विभिन्न हिस्सों से देखा गया था। अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में अगले दशक में दिखाई देगा, जो 21 मई 2031 को होगा, जबकि 20 मार्च 2034 को पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जाएगा।

क्यों है यह सूर्य ग्रहण बहुत दुर्लभ

21 जून का सूर्य ग्रहण बहुत दुर्लभ बताया जा रहा है। जिस तरह का यह ग्रहण है वैसा 900 साल बाद घटित होगा। ग्रहण के दौरान सूर्य वलयाकार की स्थिति में केवल 30 सेकंड की अवधि तक ही रहेगा। इसके चलते सौर वैज्ञानिक इसे दुर्लभ बता रहे हैं। ग्रहण के दौरान सूर्य किसी छल्ले की भांति नजर आएगा। उत्तराखंड के आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के सीनियर सांइटिस् पूर्व निदेशक डॉ. वहाबउद्दीन का कहना है कि ग्रहण तो एक अद्भुत संयोग है। इस बार के सूर्यग्रहण में जो स्थिति बनने जा रही है, उसी ने इसे दुर्लभ ग्रहणों में शामिल किया है। सूर्य चंद्रमा के बीच की दूरी ही इसकी खास वजह है।

21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। यह इस साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। 21 जून को लगने वाले सूर्य ग्रहण रिंग ऑफ फॉयर की तरह लगेगा। यह ग्रहण पूर्ण ग्रहण होगा, इसलिए दिन में रात लगने लगेगी। इस सूर्य ग्रहण में चांद सूर्य को केंद्र से कवर करेगा, जिससे सूर्य का किनारे का गोलाकर कुछ भाग दिखेगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है।

रिंग ऑफ फायर का यह नजारा कुछ सेकेंड से लेकर 12 मिनट तक देखा जा सकता है। ज्योतिषिय दृष्टि से देखा जाए तो इस ग्रहण का सूतक काल होगा। वहीं इस ग्रहण का प्रभाव भी लोगों पर पड़ेगा। इस ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाएगा। इसलिए ग्रहण के समय खाना पीना और पूजा करने की मनाही होगी। सूतक काल 20 जून की रात 10 बजे से शुरू हो जाएगा। सूर्य ग्रहण का मध् 12 बजकर 24 मिनट दोपहर पर होगा।

सूर्य के वलय पर दिखेगा चांद का पूरा आकार

21 जून को सूर्य के वलय पर चंद्रमा का पूरा आकार नजर आएगा। सूर्य का केन्द्र का भाग पूरा काला नजर आएगा, जबकि किनारों पर चमक रहेगी। इस तरह के सूर्य ग्रहण को पूरे विश्व में कहीं-कहीं ही देखा जा सकता है और अधिकांश जगह लोगों को आंशिक ग्रहण ही नजर आता है। जब भी सूर्य ग्रहण होता है, दो चंद्र ग्रहण के साथ होता है। इसमें या तो दोनों चंद्रग्रहण उससे पहले होते हैं अथवा एक चंद्रग्रहण सूर्य ग्रहण से पहले एवं दूसरा सूर्यग्रहण के बाद दिखाई देता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा (अमावस्या के चरण में) सूरज की आंशिक या पूरी रोशनी को रोक लेता है और उसी हिसाब से आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्यग्रहण होता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और घना अंधेरा छा जाता है जिसे उम्ब्रा और कम अंधेरे वाले क्षेत्र को पेनम्ब्रा के रूप में जाना जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्य ग्रहणों में सबसे दुर्लभ है। भले ही हर महीने अमावस्या आती हो, लेकिन हम ग्रहण को इतनी बार नहीं देख पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी-सूर्य प्लेन के लिहाज से चंद्रमा की कक्षा लगभग 5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। इस कारण सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का संयोग (एक ही सीध में) एक दुर्लभ खगोलीय घटना के तौर पर दिखाई देता है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

1- ग्रहण देखने के लिए और आंखों को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए ग्रहण देखने वाले चश्मों (आईएसओ प्रमाणित) या उचित फिल्टर्स के साथ कैमरे का इस्तेमाल करें।

2- वलयाकार सूर्य ग्रहण देखने का सबसे सुरक्षित तरीका पिनहोल कैमरे से स्क्रीन पर प्रोजेक्शन या टेलिस्कोप है।

3- ग्रहण के दौरान खाना-पीना, स्नान करना, बाहर जाने में कोई दिक्कत नहीं है। ग्रहण को देखना एक शानदार अनुभव होता है।

क्या  करें:

1- नंगी आंखों से सूरज को न देखें।

2- ग्रहण देखन के लिए एक्स-रे फिल्म्स या सामान्य चश्मों (यूवी सुरक्षा वाले भी नहीं) का इस्तेमाल न करें।

3- ग्रहण देखने के लिए पेंट किए ग्लास का भी इस्तेमाल न करें।

4- इस ग्रहण को देखने से न चूकें।