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आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में अवैध कटौती शर्मनाकः डा. महेन्द्र राणा
September 16, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

हरिद्वार:  उत्तराखंड के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारतीय चिकित्सा परिषद के निर्वाचित बोर्ड सदस्य डा. महेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश में कोरोना महामारी से निपटने की व्यवस्थाओं में लगे आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों के वेतन मानदेय की कटौती के नाम पर बहुत बड़ा खेल चल रहा है। इसी कड़ी में एक मामले का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि कोरोना के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय पर डाका डाला जा रहा है और निश्चित ही यह सब नेताओं-अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
  दरअसल, कोरोना महामारी से निपटने के लिए इसी वर्ष अप्रैल माह में स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न पदों पर मेडिकल ऑफिसर , लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, स्टॉफ नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय की नियुक्ति की थी , पूरे प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में डिप्लोमा-डिग्रीधारक युवाओं को निर्धारित मानदेय पर नौकरी पर रखा गया। गढ़वाल में यह काम जेड सिक्योरिटी प्रा0लि0 नाम की किसी आउटसोर्स कंपनी को दिया गया। इस कंपनी का अनुबंध स्वास्थ्य विभाग से है। आउटसोर्स कंपनी का विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के साथ सिर्फ तीन माह का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है।
  शुरुआत में जब नियुक्तियां दी गई, उस समय पदों के सापेक्ष मानदेय भी निर्धारित किया गया था। यह मानदेय एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के नोम्स के आधार पर तय किया गया। मसलन मेडिकल ऑफिसर को पच्चीस हजार ,लैब और एक्स-रे टेक्नीशियन को बारह हजार रुपये, स्टॉफ नर्स को पंद्रह हजार और वार्ड बॉय को साढ़े सात हजार रुपए दिया जाना था।

इसमें सबसे बड़ा झोल यह है कि नियुक्ति के समय अभ्यर्थियों से कटौतियों को लेकर किसी तरह की जानकारी साझा नहीं की गई और ना ही किसी तरह का कोई एग्रीमेंट साइन हुआ था। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन कर्मचारियों के मानदेय से 18 प्रतिशत जीएसटी क्यों काटा जा रहा है ? क्या वास्तव में जीएसटी लिया जा रहा है या फिर यह सिर्फ कागजों में ही है? सवाल यह भी उठता है कि कर्मचारी राज्घ्य बीमा (ईएसआई) में कर्मचारी का योगदान 0.75 प्रतिशत और रोजगार प्रदाता का योगदान 3.25 प्रतिशत होता है तो फिर कर्मचारी के मानदेय से चार प्रतिशत ईएसआई की कटौती क्यों की जा रही है? यह पैसा जा कहाँ रहा है ?

नेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ से उत्तराखण्ड में आउटसोर्स कंपनियां खूब फल-फूल रही हैं। ऊंची पकड़ होने के चलते इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। कोरोना जैसी महामारी में दिन-रात सेवाएं देने के बावजूद  लोगों का शोषण हो रहा है। इसके खिलाफ मुखरता से लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है। डा. महेंद्र राणा ने उनसे मिलने आये पीड़ित स्वास्थ्य कर्मियों को भरोसा दिलाया है कि वो उनके साथ हुए शोषण और अन्याय के विरुद्ध पूरी शिद्दत से लड़ाई लड़ेंगे।