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आसन संरक्षण रिजर्व: उत्तराखंड का पहला  अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड (आद्रभूमि)   
November 22, 2020 • Dr. SANDEEP BHARDWAJ

संजीव शर्मा, नवल टाइम्स :  आसन झील पर बने अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड के महत्व व उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालता डॉ अशोक कुमार अग्रवाल का बहुत ही ज्ञानवर्द्क लेख। डॉ अशोक कुमार अग्रवाल राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी, उत्तराखंड  में असिस्टेंट प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान एवं पर्यावरण पारिस्थितिकी वैज्ञानिक हैं।

उत्तराखंड की राजधानी  से करीब 38 किलोमीटर दूर यमुना  और आसन नदी के संगम पर स्थित आसन झील को वर्ष 2005 मे आद्र भूमि यानी वेटलैंड घोषित किया गया था  444 .40 हेक्टेयर भूभाग में फैले इस वेटलैंड मैं सर्दियों मैं खासकर अक्टूबर से फरवरी के बीच बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी साइबेरिया और अन्य ठंडे देशों से यहां शीतकालीन प्रवास पर पहुंचते हैं

 आद्र भूमि ऐसा भूभाग होता है जहां के परितंत्र का बड़ा हिस्सा अस्थाई रूप से या प्रतिवर्ष किसी मौसम में जल से संतृप्त हो या उसमें डूबा रहे या नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आद्र भूमि भी कहा जाता है दरअसल वेटलैंड ऐसे क्षेत्र हैं जहां नमी भरपूर पाई जाती है ऐसे क्षेत्रों में जलीय पौधों का बाहुल्य रहता है पूरी दुनिया में 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि के रूप में मनाया जाता है आद्र भूमि दिवस का आयोजन लोगों और हमारे ग्रह के लिए आद्र भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है इसी दिन वर्ष 1971 में ईरान के शहर में आद्र भूमि पर एक अभी समय को अपनाया गया था

 इस वर्ष आद्र भूमि की थीमस् है "आर्द्रभूमि और जैव विविधता" और 2021 की थीमस् है "आर्द्रभूमि और जल" दरअसल आद्रभूमि एक विशिष्ट प्रकार का पारिस्थितिकीय तंत्र है तथा जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण अंग है जलीय एवं स्थलीय जैव विविधताओं का मिलन स्थल होने के कारण यहाँ वन्य प्राणी प्रजातियों व वनस्पतियों की  प्रचुरता पाए जाने की वजह से वेटलैंड समूह एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र है आज के आधुनिक जीवन में मानव को सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन से है और ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी जैव विविधता का संरक्षण करें वर्ष 2017 में आद्र भूमियों के संरक्षण के लिए वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 नामक एक नया वैधानिक ढांचा बनाया गया है आद्र भूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है।

भारत में आद्र भूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है वेटलैंड जंतु ही नहीं बल्कि पादपों की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकि तंत्र है उपयोगी वनस्पतियाँ एवं औषधीय पौधे भी इस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में मिलते हैं आज भी वेटलैंड विश्व में भोजन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं वेटलैंड के नजदीक रहने वाले लोगों की जीविका बहुत हद तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर होती है वेटलैंड ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो बाढ़ के दौरान जल के आधिक्य का अवशोषण कर लेते हैं इतना ही नहीं कार्बन अवशोषण व भूजल स्तर में वृद्धि जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन कर वेटलैंड पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देते हैं वेट लैंड को बायोलॉजिकल सुपरमार्केट भी कहा जाता है क्योंकि ये विस्तृत भोज्य जाल (food webs) का निर्माण करते हैं फूड वेब  यानी भोज्य जाल में कई खाद्य श्रृंखला  शामिल होती हैं ऐसा माना जाता है कि फूडवेब पारिस्थितिकी तंत्र में जीवो के खाद्य व्यवहारों का वास्तविक परिचायक है ।

 एक समृद्ध फूड वेब जैव विविधता का परिचायक है और यही कारण है की इसे बायोलॉजिकल सुपरमार्केट कहा जाता है वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आसन कंजर्वेशन रिजर्व को उत्तराखंड का पहला रामसर स्थल बनाने की घोषणा की है जो इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का कंजर्वेशन बनाता है आसन कंजर्वेशन रिजर्व को रामसर साइट घोषित किए जाने वाले 9 मापदंडों में से 5 को पूरा करने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड के रूप में पहचान मिली है इस वेटलैंड ने दुर्लभ प्रजातियों और पारिस्थितिकी समुदाय श्रेणी जल पक्षियों और मछली की विभिन्न प्रजातियों के मानदंडों को पूरा किया है इसलिए रामसर संरक्षण रिजर्व के अंतर्राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया है इसके साथ ही अब भारत में रामसर स्थलों की संख्या 38 हो गई है जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक और उत्तराखंड का पहला रामसर स्थल है वेटलैंड्स पर भी रामसर कंजर्वेशन एक अंतर सरकारी संधि है जिस पर 2 फरवरी 1971 में पिलानी शहर रामसर में कैस्पियन सागर के दक्षिणी किनारे पर हस्ताक्षर किए गए थे ,कन्वेंशन का नाम आमतौर पर कन्वेंशन ऑफ वेटलैंड लिखा जाता है वेटलैंड वर्क कन्वेंशन में भारत 1 फरवरी 1982 में शामिल हुआ था वह वेटलैंड जो अंतरराष्ट्रीय महत्व के होते हैं उन्हें रामसर स्थल घोषित किया जाता है यह भूमि के पारिस्थितिकी चरित्र के संरक्षण के लिए सबसे पुराने अंतर सरकारी समझौतों में से एक है इसे आर्द्रभूमि  पर संधि के तौर पर भी जाना जाता है । 

इसके उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण और मानव जीवन को बनाए रखने के लिए आज भूमि का  एक वैश्विक तंत्र विकसित करना है जो वैश्विक जैव विविधता के संरक्षण और उनके पारिस्थितिकी तंत्र के घटक प्रक्रियाओं और जैव विविधता के रखरखाव के माध्यम से मानव जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है   आद्र भूमि भोजन,पानी,फाइबर, भूजल रिचार्ज, जल शोधन, कटाव नियंत्रण और जलवायु विनियमन जैसे महत्वपूर्ण संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है ।

यह वास्तव में पानी का एक बड़ा स्रोत है और हमारे मीठे पानी की मुख्य आपूर्ति आद्रभूमि से होती है जो वर्षा जल को रोकने और भूजल को रिचार्ज करने में मदद करती है रामसर संधि में 170 से अधिक देश शामिल है और इसके तहत 20 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले 2000 वेटलैंड स्थलों को मान्यता दी गई है ।

डॉ अशोक बताते हैं कि मुझे भी अक्टूबर के  अंतिम सप्ताह में आसन  कंजर्वेशन रिजर्व जाने का अवसर मिला मैंने देखा कि झील में विभिन्न प्रजातियों की  पक्षी जल क्रीड़ा करते दिखाई दिए इस संबंध में मैंने वहां के वन बीट अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि जब ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों की झीलें अक्टूबर माह में बर्फ में तब्दील  होना शुरू हो जाती हैं तो इसके चलते विदेशी पक्षी हर वर्ष हजारों किलोमीटर सफर तय कर अपना अस्थाई आशियाना बना लेते हैं अभी तक बिगरेट बर्ड्स बड़ी संख्या में पहुंचे हैं आने वाले दिनों में यहां लगभग 50 से 70 प्रजातियों की हजारों  पक्षी जल क्रीड़ा करते दिखाई देंगे इन पक्षियों की गणना नवंबर महीने में की जाएगी इन विदेशी मेहमानों को निहारने एवं पर्यटन व पक्षी प्रेमियों के लिए  आकर्षण का केंद्र  है।  ज्यादातर पक्षी पाली अर्टिक, यूरोप, मध्य एशिया व साइबेरिया आदि क्षेत्रों से आते हैं मार्च महीने तक इन सुनहरी वादियों में आराम करने के बाद यह विदेशी मेहमान वापस लौटने शुरू हो जाते हैं ।

उन्होंने बताया कि जब पानी का स्तर नीचे चला जाता है जो पक्षी यहां दिखते हैं इनको लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है विदेशी पक्षियों के आगमन के दौरान आसन वेटलैंड की सुरक्षा बढ़ा दी जाती है जिससे इन प्रवासी पक्षियों का शिकार ना हो सके।